Question:

'वीर' रस अथवा 'हास्य' रस की परिभाषा सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का आशय:
‘वीर अथवा हास्य’ में से यहाँ वीर रस का उत्तर लिखा गया है।

चरण 2: परिभाषा:
जब किसी वीरतापूर्ण कार्य, युद्ध या पराक्रम के वर्णन से हृदय में उत्साह जगे और वह विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट हो, तब वीर रस होता है। इसका स्थायी भाव उत्साह है। इसके चार भेद माने गए हैं: युद्धवीर, दानवीर, दयावीर और धर्मवीर।

चरण 3: उदाहरण:
मैं सत्य कहता हूँ सखे! सुकुमार मत जानो मुझे।
यमराज से भी युद्ध में प्रस्तुत सदा मानो मुझे॥

चरण 4: स्पष्टीकरण:
मैथिलीशरण गुप्त के ‘जयद्रथ वध’ की इन पंक्तियों में अभिमन्यु अपने सारथी से कहता है कि उसे कोमल बालक न समझा जाए। वह यमराज से भी लड़ने को तैयार है। शत्रु आलंबन है, युद्ध का अवसर उद्दीपन है। निर्भय वचन अनुभाव हैं। गर्व, औत्सुक्य और धैर्य संचारी भाव हैं। स्थायी भाव उत्साह पूरी तरह पुष्ट है।

अंतिम उत्तर:
इन पंक्तियों में वीर रस (युद्धवीर) है।
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