Question:

भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परंपरा से निःसृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नयी सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परंपरागत रूप पर्याप्त नहीं हैं।
(ख) रेखांकित अंश ('संस्कृति परंपरा से निःसृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है') की व्याख्या कीजिए।

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

व्याख्या:
यद्यपि संस्कृति की जड़ें परम्परा में होती हैं, तथापि वह स्थिर या जड़ नहीं रहती — वह समय के साथ बदलती और आगे बढ़ती रहती है। लेखक इसे विज्ञान की प्रगति से जोड़ते हुए स्पष्ट करते हैं कि जैसे-जैसे नये वैज्ञानिक आविष्कार होते हैं, संस्कृति भी उसी गति से नया रूप ग्रहण करती जाती है — वह परम्परा में बँधी रहकर भी गतिशील बनी रहती है।
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