Question:

'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर द्रोपदी चीर हरण का वृत्तान्त लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: कथा का आधार:
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी-रचित ‘सत्य की जीत’ महाभारत के सभापर्व की द्रौपदी-चीरहरण की घटना पर आधारित खण्डकाव्य है।

चरण 2: चीरहरण का वृत्तान्त (80 शब्दों के भीतर):
दुर्योधन छल से पाण्डवों को जुए में बुलाता है। युधिष्ठिर सब कुछ हारकर द्रौपदी को भी दाँव पर लगा देते हैं और हार जाते हैं। दुर्योधन की आज्ञा से दुःशासन द्रौपदी को केश पकड़कर सभा में घसीट लाता है। द्रौपदी निडर होकर सभा से न्याय माँगती है। दुःशासन उसका चीर खींचने लगता है, पर द्रौपदी के आत्मबल के आगे वह पराजित हो जाता है।

चरण 3: अतिरिक्त बिन्दु (शब्द-सीमा से बाहर):
1. द्रौपदी का तर्क है कि जो स्वयं को हार चुका, उसे मुझे दाँव पर लगाने का अधिकार नहीं था।
2. विकर्ण न्याय के पक्ष में उसका समर्थन करता है।
3. अन्त में सभा अन्याय को धिक्कारती है और पाण्डव दासता से मुक्त होते हैं।

निष्कर्ष:
इस प्रसंग से सन्देश मिलता है कि पशुबल चाहे कितना बड़ा हो, सत्य और आत्मबल के सामने उसे झुकना पड़ता है।
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