Question:

'करुण रस' अथवा 'शृंगार रस' का लक्षण और उदाहरण लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: उत्तर का चयन:
प्रश्न में दो रस दिए हैं। यहाँ पहले रस, करुण रस, का उत्तर दिया गया है।

चरण 2: लक्षण:
प्रिय व्यक्ति के वियोग, मृत्यु या किसी बड़ी हानि से मन में शोक उत्पन्न होता है। जब यही शोक विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होकर रस-रूप में अनुभव होता है, तब करुण रस कहलाता है। इसका स्थायी भाव शोक है।

चरण 3: उदाहरण:
सोक बिकल सब रोवहिं रानी। रूपु सीलु बलु तेजु बखानी॥
करहिं बिलाप अनेक प्रकारा। परहिं भूमितल बारहिं बारा॥

चरण 4: रस की पहचान:
स्थायी भाव: शोक। आलंबन: राजा दशरथ की मृत्यु। उद्दीपन: उनके रूप, शील, बल और तेज का स्मरण। अनुभाव: रोना, विलाप करना, बार-बार भूमि पर गिरना। संचारी भाव: दैन्य, विषाद, स्मृति।

अंतिम उत्तर:
ये पंक्तियाँ रामचरितमानस की हैं और इनमें करुण रस है।
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