Question:

"सैषा स्थली यत्र विचिन्वता त्वां भ्रष्टं मया नुपूरमेकमुर्व्याम्।
अदृश्यत त्वच्चरणारविन्दविश्लेषदुःखादिव बद्धमौनम् ॥"
इत्यत्र कः अलङ्कारः ?

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इव या मानो से कल्पना हो तो उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
Updated On: Oct 1, 2026
  • रूपकम्
  • उत्प्रेक्षा
  • अर्थान्तरन्यासः
  • यमकम्
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझना:
श्लोक में कौन सा अलंकार है, यह पहचानना है। श्लोक में राम सीता से कह रहे हैं कि यही वह स्थान है जहाँ तुम्हें खोजते समय मैंने धरती पर गिरा तुम्हारा एक नूपुर देखा।

चरण 2: मुख्य संकेत:
श्लोक में कहा गया है कि नूपुर 'बद्धमौनम्' था, जैसे वह तुम्हारे चरणकमलों से बिछड़ने के दुःख से चुप हो गया हो। यहाँ 'इव' (मानो) शब्द है।

चरण 3: उत्प्रेक्षा का लक्षण:
जब उपमेय में उपमान की संभावना (कल्पना) की जाए, तब उत्प्रेक्षा होती है। इसमें 'मानो', 'जैसे', 'इव' जैसे शब्द आते हैं। यहाँ नूपुर की चुप्पी में 'दुःख से मौन' होने की कल्पना की गई है।

चरण 4: अन्य विकल्प:
रूपकम् में उपमेय और उपमान का भेद मिट जाता है, पर यहाँ 'इव' से कल्पना है। अर्थान्तरन्यास में सामान्य बात से विशेष बात का समर्थन होता है, जो यहाँ नहीं है। यमक में एक ही शब्द की आवृत्ति अलग अर्थ में होती है, जो यहाँ नहीं है।

चरण 5: उत्तर:
इसलिए सही अलंकार उत्प्रेक्षा है, विकल्प 2।

अंतिम उत्तर:
श्लोक में 'दुःखादिव' से कल्पना की गई है, इसलिए अलंकार उत्प्रेक्षा है (विकल्प 2)। \[ \boxed{\text{विकल्प } 2} \]
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