Question:

दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिये:
अतीते प्रथमकल्पे चतुष्पदाः सिंहं राजानमकुर्वन् । मत्स्या आनन्दमत्स्यं, शकुनयः सुवर्णहंसम् । तस्य पुनः सुवर्णराजहंसस्य दुहिता हंसपोतिका अतीव रूपवती आसीत् । स तस्यै वरमदात् यत् सा आत्मनश्चित्तरुचितं स्वामिनं वृणुयात् इति । हंसराजः तस्यै वरं दत्त्वा हिमवति शकुनिसङ्घं समन्यपतत् । नानाप्रकाराः हंसमयूरादयः शकुनिगणाः समागत्य एकस्मिन् महति पाषाणतले संन्यपतन् । हंसराजः आत्मनः चित्तरुचितं स्वामिकम् आगत्य वृणुयात् इति दुहितरमादिदेश ।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
यह गद्यांश ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के पाठ ‘जातक-कथा’ से लिया गया है। इसमें बताया गया है कि प्रथम कल्प में पशु, मछलियों और पक्षियों ने अपने-अपने राजा कैसे चुने और हंसराज ने अपनी पुत्री के लिए क्या किया।

चरण 2: शब्दार्थ:
चतुष्पदाः = चौपाए। मत्स्याः = मछलियाँ। शकुनयः = पक्षी। दुहिता = पुत्री। चित्तरुचितम् = मन को पसन्द। वृणुयात् = चुन ले। शकुनिसङ्घे संन्यपतत् = पक्षियों के समूह में उतरा। पाषाणतले = चट्टान पर।

चरण 3: हिन्दी अनुवाद:
पहले कल्प में चौपायों ने सिंह को राजा बनाया, मछलियों ने आनन्द नामक मछली को और पक्षियों ने सुवर्णहंस को। उस सुवर्ण राजहंस की पुत्री हंसपोतिका बहुत सुन्दर थी। उसने पुत्री को वर दिया कि वह अपने मन-पसन्द पति को चुन ले। पुत्री को वर देकर हंसराज हिमालय पर पक्षियों के समूह के बीच उतरा। हंस, मोर आदि अनेक प्रकार के पक्षी आकर एक बड़ी चट्टान पर एकत्र हुए। हंसराज ने पुत्री को आदेश दिया कि वह आकर अपने मन-पसन्द वर को चुन ले।

चरण 4: सार:
हंसराज ने बेटी को अपना वर स्वयं चुनने की स्वतन्त्रता दी और इसके लिए हिमालय पर पक्षियों का समूह एकत्र हुआ।
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