दिये गये संस्कृत गद्यांश का समतुल्य हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
बौद्धयुगे इमे सिद्धान्ताः वैयक्तिकजीवनस्य अभ्युदयानाय प्रयुक्ताः आसन्। परम् अद्य इमे सिद्धान्ताः राष्ट्राणां परस्पर मैत्री सहयोगकारणानि विश्वबन्धुत्वस्य विश्वशान्तेः च साधनानि सन्ति। राष्ट्रनायकस्य श्रीजवाहरलालनेहरूमहोदयस्य प्रधानमन्त्रित्वकाले चीनदेशेन सह भारतस्य मैत्री पञ्चशीलसिद्धान्ताधिष्ठिता एवा अभवत्।
\(\textbf{Step 1: भूमिका.}\)
यह गद्यांश \(\textbf{पञ्चशील सिद्धान्तों}\) और भारत-चीन मैत्री से संबंधित है। इसमें बौद्धकालीन मूल्यों की प्रासंगिकता और आधुनिक समय में उनके प्रयोग का उल्लेख है।
\(\textbf{Step 2: अनुवाद.}\)
बौद्ध युग में ये सिद्धान्त व्यक्ति के जीवन के उत्थान के लिए प्रयुक्त होते थे। परन्तु आज यही सिद्धान्त राष्ट्रों के बीच मैत्री और सहयोग के साधन हैं तथा विश्वबंधुत्व और विश्वशांति के लिए उपयोगी हैं। जब श्री जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री थे, तब चीन के साथ भारत की मित्रता पञ्चशील सिद्धान्तों पर आधारित थी।
\(\textbf{Step 3: निष्कर्ष.}\)
यह अंश सिद्ध करता है कि प्राचीन मूल्य आज भी राष्ट्रों के संबंधों को दृढ़ और शांति-आधारित बनाने में सहायक हैं।
\[ \text{बौद्ध सिद्धान्त} \;=\; \text{व्यक्ति विकास} \;\Rightarrow\; \text{राष्ट्र सहयोग और विश्वशांति} \]
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का समतुल्य हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
अथैषः शकुनिः सर्वेषां मध्यादाशयग्रहार्थं निकृत्यः अशाब्दयत। ततः एकः काकः उद्यातं दिङ्न्तं तावत् अस्य एतस्मिन् राज्याभिषेककाले एवं रूपं मुनिं, कृत्वधरं च कीरं भविष्यति? अयमेन हि कृत्वधेन अवलक्षिताः। वयं तत्कलादौ प्रक्षिप्तास्तिलाः। इदं तत् तवैतद्धधष्याम। ईश्वरो राजा ममयं न रोचते।
दिए गए संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का संदर्भित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत गद्यांश:
संस्कृतसाहित्यस्य आदिकवि: वाल्मीकि:, महाकवि:, कविकुलगुरु: कालिदास:, अन्ये च भारत-भारवि-भव भट्टारकयो महाकवय:।
दिए गए संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का संदर्भित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत गद्यांश:
अतीव प्रथम् करने जना: एकमपिश्रम, शोभायमश्च सर्वांकार परिपूर्ण पुरुषं राजानामकुर्वन्।
दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
युवक: मालवीयः स्वकीयेन प्रभावपूर्ण भाषणेन जनानां मनांसि अमोहयत् । अतः अस्य सुहृदः तं प्राड्विवाकपदवीं प्राप्य देशस्य श्रेष्ठतरां सेवां कर्तुं प्रेरितवन्तः । तदनुसारम् अयं विधिपरीक्षामुत्रीय प्रयागस्थे उच्चन्यायालये प्राड्विवाककर्म कर्तुमारभत् । विधेः प्रकृष्टज्ञानेन मधुरालापेन उदारव्यवहारेण चायं शीघ्रमेव मित्राणां न्यायाधीशाञ्च सम्मानभाजनमभवत् ।
दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
संस्कृतसाहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः, महर्षिव्यासः, कविकुलगुरुः कालिदासः अन्ये च भास-भारवि-भवभूत्यादयो महाकवयः स्वकीयैः ग्रन्थरत्नै अद्यापि पाठकानां हृदि विराजन्ते । इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च यतो भारतमातुः स्वातन्त्र्यं, गौरवम्, अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वञ्च संस्कृते नैव सुरक्षितुं शक्यन्ते । इयं संस्कृतभाषा सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा श्रेष्ठा चास्ति । ततः सुष्ठुक्तम् 'भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती' इति ।