Question:

'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर पंचम सर्ग की कथा का वर्णन कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सर्ग का परिचय:
‘रश्मिरथी’ के पंचम सर्ग में कुन्ती और कर्ण का भावपूर्ण संवाद है। इस सर्ग को ‘माता की विनती’ कहा जाता है।

चरण 2: पंचम सर्ग की कथा (80 शब्दों के भीतर):
युद्ध से पहले कुन्ती कर्ण के पास जाती हैं और उसे अपना ज्येष्ठ पुत्र बताती हैं। वे उससे पाण्डवों के पक्ष में आने की विनती करती हैं। कर्ण अपने अपमान की पीड़ा कहता है, पर दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ता। वह वचन देता है कि अर्जुन के सिवा किसी पाण्डव को नहीं मारेगा। इस प्रकार कुन्ती के पाँच पुत्र बने रहेंगे: अर्जुन या कर्ण।

चरण 3: अतिरिक्त बिन्दु (शब्द-सीमा से बाहर):
1. कर्ण कहता है कि जीवन भर उसे सूतपुत्र कहकर ठुकराया गया, तब माता कहाँ थीं।
2. वह मित्र-धर्म को सबसे ऊपर रखता है।
3. कुन्ती निराश लौट जाती हैं।

निष्कर्ष:
इस सर्ग में कर्ण की मित्र-निष्ठा और उदारता के साथ कुन्ती की ममता और पीड़ा दिखाई गई है।
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