Question:

दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिये:
संस्कृतस्य साहित्यं सरसं, व्याकरणञ्च सुनिश्चितम् । तस्य गद्ये पद्ये च लालित्यं, भावबोधसामर्थ्यम्, अद्वितीयं श्रुतिमाधुर्यञ्च वर्तते । किं बहुना चरित्रनिर्माणार्थं यादृशीं सत्प्रेरणां संस्कृतवाङ्मयं ददाति न तादृशीं किञ्चिदन्यत् । मूलभूतानां मानवीयगुणानां यादृशी विवेचना संस्कृतसाहित्ये वर्तते, नान्यत्र तादृशी ।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के पाठ ‘संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्’ से लिया गया है। इसमें संस्कृत भाषा और साहित्य की विशेषताएँ बताई गई हैं।

चरण 2: शब्दार्थ:
सरसम् = रसपूर्ण, आनन्ददायक। सुनिश्चितम् = भलीभाँति निश्चित, नियमबद्ध। लालित्यम् = सुन्दरता, कोमलता। भावबोधसामर्थ्यम् = भाव समझाने की शक्ति। श्रुतिमाधुर्यम् = सुनने में मधुरता। वाङ्मयम् = साहित्य। विवेचना = विश्लेषण, व्याख्या।

चरण 3: हिन्दी अनुवाद:
संस्कृत का साहित्य रसपूर्ण है और उसका व्याकरण सुनिश्चित है। उसके गद्य और पद्य में सुन्दरता, भावों को समझाने की शक्ति और अनुपम श्रवण-मधुरता है। अधिक क्या कहा जाए, चरित्र-निर्माण के लिए जैसी श्रेष्ठ प्रेरणा संस्कृत साहित्य देता है, वैसी कोई दूसरा साहित्य नहीं देता। मूल मानवीय गुणों का जैसा विवेचन संस्कृत साहित्य में मिलता है, वैसा और कहीं नहीं मिलता।

चरण 4: सार:
संस्कृत भाषा मधुर, नियमबद्ध और चरित्र गढ़ने वाली है। इसीलिए उसका साहित्य सबसे अलग और श्रेष्ठ माना जाता है।
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