Question:

'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य की कथा वस्तु संक्षेप में लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: कथावस्तु (शब्द-सीमा के भीतर):
सरयू-तट के आश्रम में श्रवणकुमार नेत्रहीन माता-पिता की सेवा करता है। रात में राजा दशरथ आखेट पर आते हैं। जल भरने की ध्वनि को पशु की आवाज समझकर वे शब्दभेदी बाण चला देते हैं, जो श्रवण को लगता है। मरते समय श्रवण माता-पिता तक जल पहुँचाने को कहता है। पुत्र-वध का समाचार सुनकर पिता दशरथ को पुत्र-शोक में मरने का शाप देते हैं। राम के वनवास पर दशरथ यही घटना याद कर प्राण त्यागते हैं।

चरण 2: अतिरिक्त बिन्दु (शब्द-सीमा से बाहर):
1. ‘श्रवणकुमार’ के रचयिता डॉ. शिवबालक शुक्ल हैं। कथा वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकाण्ड में आए श्रवणकुमार-प्रसंग पर आधारित है।
2. काव्य नौ सर्गों में है: अयोध्या, आश्रम, आखेट, श्रवण, दशरथ, सन्देश, अभिशाप, निर्वाण और उपसंहार।

निष्कर्ष:
कथा का मुख्य सन्देश माता-पिता की सेवा का महत्त्व और अनजाने में हुए पाप का कठोर फल है।
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