Question:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ-सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए। 
संस्कृत गद्यांश:

महामना विद्वान् वक्ता, धार्मिको नेता, पटुः पत्रकारश्चासीत्। परमस्य सर्वोच्चगुणः जनसेवैव आसीत्। यत्र कुत्रापि अयं जनान् दुःखितान् पीड्यमानांश्चापश्यत् तत्रैव सः शीघ्रमेव उपस्थितः। सर्वविधं साहाय्यञ्च अकरोत्। प्राणिसेवा अस्य स्वभाव एवासीत्।

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अनुवाद करते समय मूल अर्थ को बनाए रखते हुए उसे सरल हिंदी में प्रस्तुत करें।
Updated On: Nov 7, 2025
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Solution and Explanation

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश में एक महान व्यक्ति के गुणों और उनकी समाजसेवा की भावना का वर्णन किया गया है।
अनुवाद: यह महान व्यक्ति एक विद्वान, कुशल वक्ता, धार्मिक नेता और योग्य पत्रकार था। उसका सबसे बड़ा गुण जनसेवा था। जब भी उसने कहीं दुखी या पीड़ित लोगों को देखा, तो वह तुरंत उनकी सहायता के लिए पहुँच जाता। उसने हर प्रकार से जरूरतमंदों की सहायता की। प्राणियों की सेवा करना उसका स्वाभाविक गुण था।
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