Question:

निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत रस पहचानकर उनके नाम लिखिए (कोई दो): 
(1) सुकुकु-सुकुकु नास से पित्त (मवाद) निकल रहा है, 
नाकिका से स्रवण पदार्थ निकल रहा है। 
(2) राम के रूप निहारति जानकी, कंकन के मन की परछाई। 
यामिनी बैरु भुली गई, कर टेंकति ऐर तारता नाही।। 
(3) माला फेरत जुग गया, मन न फिरतो फेर। 
कर का मनका फेर दे, मन का मनका फेर।। 
(4) तू दयालु दीन बंधु, तू तारन के अधिकारी। 
हिं प्रबल दुःख पातकी, तू प्रभु पुकारारी।। 
 

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काव्य में रस वही होता है जो पाठक के मन में भावात्मक आनंद उत्पन्न करे — यह काव्य की आत्मा माना गया है।
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Solution and Explanation

Step 1: प्रश्न की व्याख्या.
इस प्रश्न में विभिन्न कविताओं की पंक्तियों में छिपे रसों की पहचान करनी है। रस वह भाव है जो काव्य को आनंदमय बनाता है और पाठक के मन में विशिष्ट भावना उत्पन्न करता है।

Step 2: विश्लेषण.
(1) "सुकुकु-सुकुकु नास से पित्त निकल रहा है" — यहाँ शरीर से मवाद निकलने की घृणित स्थिति का वर्णन है, अतः बीभत्स रस
(2) "राम के रूप निहारति जानकी..." — प्रेम और सौंदर्य के भाव से युक्त, अतः श्रृंगार रस
(3) "माला फेरत जुग गया..." — मन के वैराग्य और आत्मचिंतन की भावना है, अतः शांत रस
(4) "तू दयालु दीन बंधु..." — ईश्वर के प्रति समर्पण, प्रार्थना और श्रद्धा का भाव प्रकट करता है, अतः भक्ति रस

Step 3: निष्कर्ष.
प्रत्येक रस काव्य की भावभूमि और कवि की अनुभूति को सशक्त बनाता है, जिससे काव्य में रसात्मकता उत्पन्न होती है।

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