Question:

नीचे दो कथन दिए गए हैं: 
A. जब एक p-n संधि डायोड के सिरों के बीच, अग्रदिशिक बायस वोल्टता एक निश्चित मान की देहली वोल्टता से अधिक बढ़ती है, तो डायोड की धारा में सार्थक वृद्धि होती है। 
B. इस धारा को प्रतीप संतृप्त धारा कहते हैं। 
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए: 
 

Show Hint

डायोड की शब्दावली में स्पष्ट रहें: अग्र अभिनति में "अग्र धारा" और "देहली वोल्टेज" होते हैं, जबकि पश्च अभिनति में "प्रतीप संतृप्त धारा" और "भंजन वोल्टेज" (breakdown voltage) होते हैं।
Updated On: May 4, 2026
  • कथन A और B दोनों गलत हैं
  • कथन A सही है, परन्तु कथन B ग़लत है
  • कथन A और B दोनों सही हैं
  • कथन A ग़लत है, परन्तु कथन B सही है
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collegedunia
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The Correct Option is B

Solution and Explanation



Step 1: Analyzing Statement A:

कथन A कहता है कि जब एक p-n संधि डायोड अग्र अभिनत (forward biased) होता है, और लागू वोल्टेज एक निश्चित देहली वोल्टेज (threshold voltage or knee voltage) से अधिक हो जाता है, तो धारा में तेजी से वृद्धि होती है।
यह कथन सही है। यह अग्र अभिनत p-n संधि डायोड के V-I अभिलक्षणिक वक्र का एक मौलिक गुण है। देहली वोल्टेज (सिलिकॉन के लिए ~0.7V, जर्मेनियम के लिए ~0.3V) पर, अवक्षय परत (depletion layer) की चौड़ाई बहुत कम हो जाती है, और बहुसंख्यक आवेश वाहकों का प्रवाह तेजी से बढ़ता है।


Step 2: Analyzing Statement B:

कथन B कहता है कि इस धारा (जो अग्र अभिनति में बहती है) को प्रतीप संतृप्त धारा (reverse saturation current) कहा जाता है।
यह कथन गलत है। अग्र अभिनति में बहने वाली धारा को अग्र धारा (forward current) कहा जाता है। प्रतीप संतृप्त धारा वह छोटी, लगभग स्थिर धारा है जो तब बहती है जब डायोड पश्च अभिनत (reverse biased) होता है, और यह अल्पसंख्यक आवेश वाहकों के कारण होती है।


Step 3: Final Conclusion:

कथन A सही है, लेकिन कथन B गलत है। इसलिए, सही विकल्प (B) है।
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