'जूठन' दलित आत्मकथा शीर्षक काव्य है, जिसे ओमप्रकाश वाल्मीकि ने लिखा। यह रचना दलित समाज की दारुण स्थिति और उनके संघर्ष को प्रस्तुत करती है। ओमप्रकाश वाल्मीकि की यह कृति समाज के ताने-बाने और जातिवाद की सच्चाईयों को उजागर करती है।
'जूठन' ओमप्रकाश वाल्मीकि द्वारा लिखी गई एक प्रमुख काव्य रचना है, जो भारतीय समाज में व्याप्त जातिवाद और दलितों की उत्पीड़न की कहानी को बयां करती है। इस रचना में वाल्मीकि ने अपनी आत्मकथा के माध्यम से दलित जीवन के संघर्ष, कष्ट और उत्पीड़न को व्यक्त किया है। 'जूठन' न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव है, बल्कि यह पूरे दलित समाज की पीड़ा, असमानता और तिरस्कार को उजागर करता है। वाल्मीकि की यह कृति दलित साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली उदाहरणों में से एक मानी जाती है, जो जातिवाद के खिलाफ एक सशक्त आवाज़ उठाती है। इसके माध्यम से उन्होंने समाज के उस हिस्से को सामने लाया, जिसे इतिहास और साहित्य में अक्सर उपेक्षित किया गया है। यह काव्य रचना दलितों की संघर्षमय यात्रा और उनके अधिकारों की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जाती है।