'नीड़ का निर्माण फिर' हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित एक प्रेरणादायक निबंध है। यह रचना स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात भारतीय समाज और राष्ट्र-निर्माण की आवश्यकता पर आधारित है। इसमें लेखक ने यह संदेश दिया है कि जैसे पक्षी अपने नीड़ (घोंसले) को फिर से बनाते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी अपने राष्ट्र और समाज का पुनर्निर्माण करना चाहिए।
यह निबंध देशभक्ति, परिश्रम, आत्मबल और कर्मशीलता के उच्च मूल्यों को प्रस्तुत करता है। 'दिनकर' जी ने अत्यंत प्रभावशाली भाषा, ओजस्वी भाव और तर्कपूर्ण शैली के माध्यम से यह दर्शाया है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी कार्य समाप्त नहीं होता, बल्कि राष्ट्र के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
अतः स्पष्ट है कि 'नीड़ का निर्माण फिर' एक निबंध विधा की रचना है, जिसमें विचारप्रधानता और प्रेरणादायक संदेश दोनों का सुंदर समन्वय है।