'लोकायतन' हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पन्त की एक अत्यंत महत्वपूर्ण काव्य-कृति है। यह उनकी उत्तर-छायावादी रचनाओं में से एक है, जिसमें उन्होंने भारतीय संस्कृति, दर्शन, और मानवतावाद के गहरे तत्वों को कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया है।
'लोकायतन' शब्द का अर्थ है — लोक से जुड़ी हुई दृष्टि या जीवन-दर्शन। इस काव्य-संग्रह में पन्त जी ने जीवन को आध्यात्मिकता और मानवता के समन्वय के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी भाषा में सौंदर्य, माधुर्य, और विचार की गहराई का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है।
सुमित्रानंदन पन्त की इस रचना में मानवता के प्रति गहरा विश्वास और समाज के नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का आग्रह मिलता है। यह उनकी काव्य-दृष्टि के विकास की परिपक्व अवस्था का प्रतीक है।
अतः 'लोकायतन' के रचनाकार सुमित्रानंदन पन्त हैं, जिनकी कविताएँ सौंदर्य, संवेदना, और मानवतावाद के सुंदर मिश्रण के लिए प्रसिद्ध हैं।