'करुण' रस अथवा 'शांत' रस का लक्षण बताते हुए उसका एक उदाहरण लिखिए।
करुण रस: करुण रस वह रस है, जो शोक, दुःख या पीड़ा की भावना उत्पन्न करता है। इसका स्थायी भाव शोक होता है।
उदाहरण:
"सखि वे मुझसे कह कर जाते,
कहा छोड़ अब परदेश बसे।"
शांत रस: शांत रस वह रस है, जिसमें वैराग्य, त्याग और मन की शांति की भावना होती है। इसका स्थायी भाव निर्वेद होता है।
उदाहरण:
"सब कुछ छोड़ चला मैं, अब तेरा ही सहारा।"
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
'विभाव' (विस्तारक) श्रृंगार रस अथवा 'करण' रस का संक्षेप में उदाहरण अथवा परिभाषा लिखिए।
'संयोग श्रृंगार' रस अथवा 'करुण' रस का लक्षण सहित एक उदाहरण लिखिए।
'करुण रस' अथवा 'शान्त रस' का स्थायी भाव के साथ उदाहरण अथवा परिभाषा लिखिए
'शृंगार' रस अथवा 'शांत' रस का लक्षण और एक उदाहरण लिखिए।
'वीर' रस अथवा 'हास्य' रस की परिभाषा लिखिए एवं एक उदाहरण दीजिए।