'कर्मवीर भरत' खंडकाव्य के आधार पर कैकेयी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Step 1: परिचय.
रामकथा में कैकेयी का चरित्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। 'कर्मवीर भरत' खंडकाव्य में कवि ने कैकेयी को एक जटिल और बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में चित्रित किया है। वह कभी स्नेहिल माता के रूप में तो कभी महत्वाकांक्षी और स्वार्थपरायण स्त्री के रूप में सामने आती है।
Step 2: प्रेमिल माता का रूप.
प्रारंभ में कैकेयी राम को अत्यंत स्नेह करती थी। वह राम को अपने पुत्र के समान मानती थी। राम के गुणों और शील से वह प्रभावित रहती थी। किन्तु परिस्थितियों ने उसके मनोभावों को बदल दिया।
Step 3: महत्वाकांक्षी और स्वार्थी रूप.
जब मंथरा ने उसे भरत को राजा बनाने का लोभ दिखाया, तब कैकेयी का हृदय परिवर्तित हो गया। उसने दशरथ से दो वरदान मांगकर राम को वनवास और भरत को राजसिंहासन दिलाया। इस कारण वह लोक में निंदित हुई। उसके इस आचरण से राम, दशरथ और संपूर्ण अयोध्या को दुःख सहना पड़ा।
Step 4: परिणाम और शिक्षा.
हालांकि कैकेयी का उद्देश्य पुत्र प्रेम और महत्वाकांक्षा से प्रेरित था, परंतु उसके इस कार्य ने पूरे राज्य को संकट में डाल दिया। वह स्वयं भी अंततः पश्चाताप और दुःख का अनुभव करती है। कवि ने उसके माध्यम से यह संदेश दिया है कि संकीर्ण स्वार्थ और महत्वाकांक्षा विनाश का कारण बनती है।
Step 5: निष्कर्ष.
इस प्रकार, कैकेयी का चरित्र एक जटिल व्यक्तित्व है जिसमें स्नेह और लोभ, प्रेम और स्वार्थ दोनों का मेल दिखाई देता है। उसका जीवन हमें यह सिखाता है कि तात्कालिक स्वार्थ बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'तृमूल' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) 'तृमूल' खण्डकाव्य का कथानक संक्षेप में लिखिए।
'अमृतपूजा' खण्डकाव्य की
(i) कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) श्रीकृष्ण का चरित्रांकन कीजिए।
'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) किसी एक सर्ग का कथानक लिखिए।
'कर्ण' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) कर्ण का चरित्रांकन कीजिए।
(ii) तृतीय सर्ग की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
'ज्योति – जवाहर' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।