Question:

'जय सुभाष' खण्डकाव्य के 'द्वितीय सर्ग' का सारांश संक्षेप में लिखिए।

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सर्ग-आधारित प्रश्नों के उत्तर में घटनाओं को क्रमवार लिखना चाहिए ताकि उत्तर व्यवस्थित और संपूर्ण लगे।
Updated On: Oct 28, 2025
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Solution and Explanation

'जय सुभाष' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग में सुभाषचन्द्र बोस के प्रारम्भिक जीवन और उनके भीतर विकसित होती देशभक्ति की भावना का चित्रण है।
1. इस सर्ग में वर्णन है कि सुभाष बाल्यावस्था से ही गंभीर, अनुशासनप्रिय और कर्मनिष्ठ थे।
2. विद्यार्थी जीवन में उनमें देश के प्रति समर्पण की भावना प्रबल हो गई थी। वे अन्याय और अन्यायियों के विरोधी थे।
3. उन्होंने अंग्रेजी शासन की कठोर नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई और भारतीय युवाओं को जागृत करने का प्रयास किया।
4. कवि ने इस सर्ग के माध्यम से सुभाष के दृढ़ संकल्प, नेतृत्व क्षमता और देशप्रेम की नींव को उजागर किया है।
इस प्रकार द्वितीय सर्ग सुभाषचन्द्र बोस के जीवन की प्रेरणादायक शुरुआत का सशक्त चित्र प्रस्तुत करता है।
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