'इत्यादि' का सही सन्धि-विच्छेद है
Step 1: शब्द की संरचना.
'इत्यादि' का निर्माण 'इति' + 'आदि' से हुआ है।
'इति' का अर्थ है "इस प्रकार" और 'आदि' का अर्थ है "और अन्य"।
Step 2: सन्धि का विश्लेषण.
'इति' और 'आदि' के मेल से 'इत्यादि' बनता है। यहाँ 'इ' और 'आ' के मिलने से 'या' ध्वनि उत्पन्न होती है।
Step 3: विकल्पों का विश्लेषण.
(A) इति + आदि – सही उत्तर।
(B) इत् + यदि – गलत, यह 'इत्यादि' का रूप नहीं है।
(C) इत्य + आदि – गलत है, यह शब्द का मूल विच्छेद नहीं है।
(D) इनमें से सभी – गलत है क्योंकि केवल (A) सही है।
Step 4: निष्कर्ष.
इस प्रकार सही उत्तर है (A) इति + आदि।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'अधिग्रहण' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है :
प्रत्यय के कितने भेद हैं?
'तिरंगा' में कौन-सा समास है?
'प्रत्येक' शब्द में कौन-सी सन्धि है ?
'खीर' का तत्सम रूप है :