'हंस' पत्रिका हिंदी साहित्य की अत्यंत प्रसिद्ध और प्रभावशाली पत्रिकाओं में से एक थी, जिसके प्रथम संपादक प्रेमचन्द थे। यह पत्रिका 1930 में प्रारंभ की गई थी और इसका उद्देश्य सामाजिक, राजनीतिक तथा साहित्यिक चेतना का प्रसार करना था।
प्रेमचन्द ने 'हंस' के माध्यम से हिंदी समाज में यथार्थवादी साहित्य की नींव रखी। उन्होंने इसमें न केवल अपने विचार प्रस्तुत किए, बल्कि समकालीन लेखकों को भी समाज-सुधार और राष्ट्र-निर्माण से जुड़ने की प्रेरणा दी। पत्रिका के लेखों और कहानियों में दलितों, स्त्रियों और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
'हंस' पत्रिका ने भारतीय समाज में प्रगतिशील विचारधारा को मजबूत किया और साहित्य को जनता के जीवन से जोड़ने का कार्य किया। बाद में इस पत्रिका का संपादन महादेवी वर्मा और राजेन्द्र यादव ने भी किया, परंतु इसकी नींव और प्रतिष्ठा प्रेमचन्द के संपादन काल में ही स्थापित हुई।
अतः स्पष्ट है कि 'हंस' पत्रिका के प्रथम संपादक प्रेमचन्द थे, जिन्होंने इसे सामाजिक जागरण का माध्यम बनाया।