गाथांशं पठित्वा निर्दिश्तः: कुतः? कथम्?
एकस्मिन् दिने शङ्कुः स्नानार्थं पूर्णानदीं गतः। यदा सः स्नाते मनः तत् एकः नक्रः आगतः। नक्रः झटिति तस्य पादम् अङ्क्षिप्त। तदा शङ्कुः उच्चैः आक्रोशतः ''अम्ब! त्रायस्व। नक्रात् त्रायस्व!'' आक्रोशं श्रुत्वा नेतरीतं ग्राम आसन्नं पूर्वं नक्रं गृहाति पत्स्यति। भयाकुला सा अपि रोदनम् आरभत। शङ्कुः मातरं आमन्त्र्य प्रार्थयत्- ''अम्ब, इतः परम अहं न जीवामि। मरणात् पूर्वं संन्यासं भिक्ष्ये इत्येव।''
अधुना वा देहि अनुमतिम्। ''चेतसा अनिच्छन्ती अपि विवशा माता अम्बवत्- ''वत्स, यथा तुभ्यं रोचते तथैव भवतु। इदानीमेव संन्यासं स्वीकरोतु। मम अनुमतिः अस्ति'' इति। तक्षणमेव आचार्यं घटीतम्। देवव्रतात् शङ्कुः नक्रात् मुक्तः। स नदी तीर्त्वा आगत्य मातुः चरणौ प्रणमत्।
अनन्तरं शङ्कुः मातरं संन्यासस्य महत्वं अवबोधयत्। संन्यासी न केवलम् एकस्याः पुत्रः। विशालं जन्तु एव तस्य गृहम्। 'मातः, यदा त्वं स्मरिष्यसि तदा एव तस्मिन पीडामग्न्याम्' इति मात्रे प्रस्थित्य सः गृहात् निरगच्छत्। ततः गोविन्दभगवतानां शिष्यः भूत्वा सः सर्वाणि दर्शिनी अपठत्। तस्यः संन्यासी दीक्षा गृहित्वा वैदिकधर्मस्य स्थापना अर्थं प्रस्थानम् अकरोत्।
अष्टवर्षे चतुर्वेदी द्वादशे सर्वशास्त्रवित्। चौदशे कृतवान भाष्यं दानीं मुनिरन्यः।
\[\begin{array}{|c|c|} \hline \textbf{विशेषणम्} & \textbf{विशेष्यम्} \\ \hline \text{(1) गृहीतम्} & \text{माता} \\ \hline \text{(2) विवशा} & \text{पुत्रम्, दर्शनानि} \\ \hline \end{array}\]
तक्षणमेव = तक्षणम् + \(\underline{एव}\)।
गृहीतमपश्यत् = \(\underline{गृहीतम्}\) + अपश्यत्।
निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥
सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने॥
बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥
येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
गाड़ी छूट रही थी। सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर, जरा दौड़कर उसमें चढ़ गए। अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था। एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताजे-चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे। डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आँखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखाई दिया। सोचा, हो सकता है, यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों।
नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं।
ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा न हो कि शहर का कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफ़र करता देखे।
परंपरागत भोजन को लोकप्रिय कैसे बनाया जा सकता है ?
i. उपलब्ध करवाकर
ii. प्रचार-प्रसार द्वारा
iii. बिक्री की विशेष व्यवस्था करके
iv. घर-घर मुफ्त अभियान चलाकर विकल्प:
बार-बार आती है मुखाकृति मधुर, याद बचपन तेरी।
गया ले गया तू जीवन की सबसे मधुर खुशी मेरी।
चिंता रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्बंध स्वच्छंद।
कैसे भुला जा सकता है बचपन का अद्भुत आनंद।
ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था, छुआ-छूत किसे कहते?
बनी हुई थी वहीं झोपड़ी और सीपियों से नावें।
रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे।
बड़े-बड़े मोती सी आँसू, चुपचाप बहा जाते थे।
वह सुख जो साधारण जीवन छोड़कर महत्वाकांक्षाएँ बड़ी हुईं।
टूट गईं कुछ खो गईं हुई-सी दौड़-धूप घर खड़ी हुईं।
नाटक की तरह एकांकी में चरित्र अधिक नहीं होते। यहाँ प्रायः एक या अधिक चरित्र नहीं होते। चरित्रों में भी केवल नायक की प्रधानता रहती है, अन्य चरित्र उसके व्यक्तित्व का प्रसार करते हैं। यही एकांकी की विशेषता है कि नायक सर्वत्र प्रमुखता पाता है। एकांकी में घटनाएँ भी कम होती हैं, क्योंकि सीमित समय में घटनाओं को स्थान देना पड़ता है। हास्य, व्यंग्य और बिंब का काम अक्सर चरित्रों और नायक के माध्यम से होता है। एकांकी का नायक प्रभावशाली होना चाहिए, ताकि पाठक या दर्शक पर गहरा छाप छोड़ सके।
इसके अलावा, घटनाओं के उद्भव-पतन और संघर्ष की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि नायक ही संपूर्णता में कथा का वाहक होता है। यही कारण है कि नाटकों की तरह इसमें अनेक पात्रों का कोई बड़ा-छोटा संघर्ष नहीं होता। नायक के लिए सर्वगुणसंपन्न होना भी आवश्यक नहीं होता। वह साधारण जीवन जीता हुआ व्यक्ति भी हो सकता है।
इस गद्यांश से यह स्पष्ट होता है कि एकांकी में चरित्रों की संख्या सीमित होती है, नायक अधिक प्रभावशाली होता है और बाहरी संघर्ष बहुत कम दिखाया जाता है।
Study the entries in the following table and rewrite them by putting the connected items in the single row: 