Question:

दिए गए संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सरल हिंदी में अनुवाद कीजिए। 
संस्कृत गद्यांश: 
मैत्रेयी उवाच-यदहं सर्व पृथिवी वित्तेन पूर्णा स्याम, तत्किं नेनामृता स्यामिति।याज्ञवल्क्य उवाच-नेति। यथैवोपकरणवतां जीवनं तथैव ते जीवनं स्यात्। अनुपलब्ध्वा तु नाशासि वितेनैति। मा मैत्रेयी क्वथा नः।सति तं प्रियं भवेत्।

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संस्कृत अनुवाद में सरल और सटीक शब्दों का प्रयोग करना आवश्यक होता है।
Updated On: Nov 10, 2025
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Solution and Explanation

मैत्रेयी ने पूछा - ''यदि मैं संपूर्ण पृथ्वी के धन से परिपूर्ण हो जाऊँ, तो क्या मैं अमर हो जाऊँगी?'' याज्ञवल्क्य ने उत्तर दिया - ''नहीं। जैसे साधनों से जीवनयापन करने वालों का जीवन होता है, वैसे ही तुम्हारा जीवन होगा। धन से अमरता प्राप्त नहीं होती।''
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