दिये गये पद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
जल-बिन्दु-निपातेन क्रमशः पूर्यते घटः ।
सहेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च ।।
सन्दर्भ: यह श्लोक संस्कृत में शिक्षा, धर्म और धन के संदर्भ में दिया गया है, और यह यह बताता है कि जैसे जल बूँद-बूँद से घड़ा भरता है वैसे ही ज्ञान, धर्म और धन भी धीरे-धीरे बढ़ते हैं।
हिन्दी अनुवाद: जैसे जल की प्रत्येक बूँद से घड़ा धीरे-धीरे भरता है, वैसे ही सभी प्रकार की विद्या, धर्म और धन भी धीरे-धीरे अपनी गति से इकट्ठे होते हैं। इसमें धैर्य और संयम का होना आवश्यक है, क्योंकि एक-एक कदम से ही समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
दिये गये पद्यांशों में से किसी एक का समतुल्य हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्याक्षे प्रियवादिनम्। वर्जयेत् तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्।।
दिये गये पद्यांश का समतुल्य हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि। लोकॊत्तराणां चेतांसि को न विजातुमर्हति।।
दिये गये पद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
न मे रोचते भद्रं वः उलूकस्याभिषेचनम् ।
अक्रुद्धस्य मुखं पश्य कथं क्रुद्धो भविष्यति ।।
दिए गए पद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
पद्यांश 1:
ज्यायते ते महाभागा जनसेवा परायणः।
जायतुर्भयं नास्ति येषां कीर्तिः तेषां कवितम्।।
दिए गए पद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
पद्यांश 2:
न मे रोदन्ति भ्रातरोऽल्पकार्याभिषेचने।
अकृत्वा मुखं पश्च कर्हं कृतं भविष्यति।।