लाजरस के अनुसार तनाव मूल्यांकन से उत्पन्न होता है—इसीलिए समान घटना किसी को चुनौती, किसी को खतरा लगती है। मैक्रो (प्राकृतिक आपदा, महामारी) और माइक्रो तनावक (दैनिक hassles) दोनों असर डालते हैं; शोध बताता है कि बार-बार की छोटी झुंझलाहटें कुल तनाव-भार को तेजी से बढ़ाती हैं। कार्य में मांग–नियंत्रण असंतुलन (कड़ी मांग, कम नियंत्रण) और कम सामाजिक समर्थन बर्नआउट को जन्म देते हैं। आंतरिक स्तर पर परिपूर्णतावाद, नकारात्मक स्व-वार्ता, कैटास्ट्रोफाइजिंग और कम आत्म-प्रभावकारिता तनाव को बढ़ाते हैं। प्रबंधन: समस्या-केंद्रित (भूमिका-स्पष्टता, प्राथमिकता, समय-प्रबंधन), भाव-केंद्रित (श्वसन, माइंडफुलनेस, व्यायाम), सामाजिक समर्थन, नींद-स्वच्छता, और डिजिटल सीमाएँ (नोटिफिकेशन/स्क्रीन-डाइट)। संगठनात्मक स्तर पर वर्क-लोड संतुलन और लचीली नीतियाँ सहायक हैं।