अशोक वाजपेयी ने राज्य की सेवा आलोचक के रूप में की थी। वह हिंदी साहित्य के प्रमुख आलोचकों में से एक माने जाते हैं और उनके आलोचनात्मक दृष्टिकोण ने साहित्यिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अशोक वाजपेयी एक महत्वपूर्ण साहित्यिक आलोचक और कवि हैं, जिनकी आलोचनाएँ साहित्यिक जगत में अत्यधिक प्रतिष्ठित मानी जाती हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर गहरी आलोचनाएँ प्रस्तुत की हैं, जिनमें साहित्य, संस्कृति और समाज के संबंधों पर प्रकाश डाला गया है। उनका आलोचनात्मक दृष्टिकोण केवल साहित्यिक कृतियों के विश्लेषण तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने साहित्य को सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में भी देखा और समझा। उनके विचारों में मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मुद्दों का गहरा असर था, और उन्होंने साहित्य को न केवल कला के रूप में, बल्कि समाज के उत्थान के साधन के रूप में भी देखा। उनका योगदान हिंदी साहित्य के आलोचनात्मक क्षेत्र में अतुलनीय रहा है, और उनकी रचनाएँ और आलोचनाएँ आज भी साहित्यिक अध्ययन और चर्चा का हिस्सा हैं।