'अनुप्रास' अथवा 'उत्प्रेक्षा' अलङ्कार का लक्षण एवं उदाहरण लिखिए
अनुप्रास अलंकार तब होता है जब किसी कविता या गद्य में किसी विशेष ध्वनि या वर्ण का पुनरावृत्ति होती है। इसमें शब्दों के पहले या अंत में समान ध्वनियों का प्रयोग होता है, जिससे संगीतात्मकता और माधुर्यता उत्पन्न होती है।
लक्षण: 'अनुप्रास' में दो या दो से अधिक शब्दों में समान ध्वनियां या स्वर होते हैं।
उदाहरण: "नदी में नौका, नाव में नायक" - यहाँ 'न' ध्वनि की पुनरावृत्ति हुई है।
उत्प्रेक्षा अलंकार तब होता है जब किसी वस्तु या परिस्थिति के माध्यम से कोई अन्य अर्थ या भाव व्यक्त किया जाता है। यह अप्रत्यक्ष रूप से किसी अन्य विचार या विचारधारा को प्रकट करता है।
लक्षण: उत्प्रेक्षा में किसी वस्तु या घटना के द्वारा अन्य अर्थ की ओर संकेत किया जाता है।
उदाहरण: "चाँद को देखा तो प्रिय की याद आई" - यहाँ चाँद के माध्यम से प्रिय की याद का भाव व्यक्त हो रहा है।
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