'अग्निपूजा' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
Step 1: प्रस्तावना.
'अग्निपूजा' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग में युद्ध की भीषणता और धर्म-अधर्म के संघर्ष का गहन चित्रण किया गया है। इसमें अग्नि को युद्ध और बलिदान का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत किया गया है।
Step 2: मुख्य प्रसंग.
द्वितीय सर्ग में पांडवों के साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा का वर्णन है। युद्धभूमि की ज्वालाओं के बीच उनका संघर्ष और धर्म की रक्षा के लिए उनका संकल्प स्पष्ट दिखाई देता है। अग्निपूजा के रूप में बलिदान और धर्मपालन का आदर्श प्रस्तुत किया गया है।
Step 3: भाव और संदेश.
इस सर्ग में कवि ने यह संदेश दिया है कि धर्म की रक्षा और अन्याय के विनाश के लिए संघर्ष करना आवश्यक है। बलिदान ही धर्मयुद्ध की आत्मा है।
Step 4: सार.
द्वितीय सर्ग युद्ध की ज्वालाओं में धर्म और सत्य की स्थापना तथा बलिदान की महिमा का वर्णन करता है।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'तृमूल' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) 'तृमूल' खण्डकाव्य का कथानक संक्षेप में लिखिए।
'अमृतपूजा' खण्डकाव्य की
(i) कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) श्रीकृष्ण का चरित्रांकन कीजिए।
'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) किसी एक सर्ग का कथानक लिखिए।
'कर्ण' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) कर्ण का चरित्रांकन कीजिए।
(ii) तृतीय सर्ग की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
'ज्योति – जवाहर' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।