'अग्निपूजा' खण्डकाव्य के आधार पर 'श्रीकृष्ण' का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Step 1: परिचय.
'अग्निपूजा' खण्डकाव्य में श्रीकृष्ण का चरित्र धर्म, नीति और कूटनीति का अद्भुत संगम है। वे पांडवों के मार्गदर्शक, उपदेशक और धर्मयुद्ध के प्रेरक के रूप में चित्रित किए गए हैं।
Step 2: नीति-पुरुष.
श्रीकृष्ण धर्म की स्थापना के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। वे युद्धभूमि में केवल योद्धा के रूप में नहीं, बल्कि नीति और धर्म के रक्षक के रूप में प्रस्तुत होते हैं। उनका चरित्र यह सिद्ध करता है कि धर्म की रक्षा के लिए कभी-कभी कूटनीति और रणनीति का सहारा लेना आवश्यक होता है।
Step 3: दूरदर्शिता.
उन्होंने पांडवों को धर्मयुद्ध में विजय दिलाने के लिए सही मार्गदर्शन दिया। उनकी दूरदर्शिता और अदम्य आत्मबल ने पांडवों को साहस और आत्मविश्वास प्रदान किया।
Step 4: आदर्श नेतृत्व.
श्रीकृष्ण का चरित्र आदर्श नेतृत्व का प्रतीक है। वे धर्म और नीति के मार्गदर्शक होने के साथ-साथ करुणा, नीति-निपुणता और दृढ़ संकल्प से युक्त व्यक्तित्व के रूप में प्रकट होते हैं।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'तृमूल' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) 'तृमूल' खण्डकाव्य का कथानक संक्षेप में लिखिए।
'अमृतपूजा' खण्डकाव्य की
(i) कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) श्रीकृष्ण का चरित्रांकन कीजिए।
'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) किसी एक सर्ग का कथानक लिखिए।
'कर्ण' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) कर्ण का चरित्रांकन कीजिए।
(ii) तृतीय सर्ग की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
'ज्योति – जवाहर' खण्डकाव्य के आधार पर
(i) नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।