चरण 1: प्रश्न को समझना:
प्रश्न में कायिक संकरण (somatic hybridization) की प्रक्रिया के चरणों को उनके सही क्रम में व्यवस्थित करने के लिए कहा गया है।
चरण 2: कायिक संकरण के चरणों का विश्लेषण:
कायिक संकरण एक ऐसी तकनीक है जिसमें दो अलग-अलग पादप प्रजातियों की कायिक कोशिकाओं के प्रोटोप्लास्ट को संलयित करके एक संकर पौधा बनाया जाता है। इसके चरण इस प्रकार हैं:
• (D) एकल कोशिकाओं का पृथक्करण: सबसे पहले, दो अलग-अलग पौधों की किस्मों से वांछित एकल कोशिकाओं (जैसे, पत्ती की मीजोफिल कोशिकाओं) को अलग किया जाता है।
• (A) कोशिका भित्ति का पाचन: फिर, इन कोशिकाओं की कोशिका भित्ति को एंजाइमों (जैसे, सेल्युलेस और पेक्टिनेस) का उपयोग करके पचाया जाता है ताकि कोशिका झिल्ली से घिरा 'नग्न' प्रोटोप्लास्ट प्राप्त हो सके।
• (B) नग्न प्रोटोप्लास्ट का विलगन: पाचन के बाद, शुद्ध और स्वस्थ प्रोटोप्लास्ट को अलग किया जाता है।
• (C) प्रोटोप्लास्ट का संलयन: दो अलग-अलग किस्मों के प्रोटोप्लास्ट को एक साथ संलयित करने के लिए प्रेरित किया जाता है, आमतौर पर पॉलीइथाइलीन ग्लाइकॉल (PEG) या उच्च वोल्टेज का उपयोग करके। इससे एक संकर प्रोटोप्लास्ट बनता है जिसमें दोनों माता-पिता के नाभिक होते हैं।
• (E) संकरित प्रोटोप्लास्ट को उगाना: अंत में, संकर प्रोटोप्लास्ट को एक उपयुक्त संवर्धन माध्यम पर उगाया जाता है। यह पहले एक नई कोशिका भित्ति बनाता है, फिर विभाजित होकर एक कैलस बनाता है, और अंततः एक पूर्ण संकर पौधे में विकसित होता है।
चरण 3: सही क्रम का निर्धारण:
उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर, चरणों का सही क्रम है:
D \(\rightarrow\) A \(\rightarrow\) B \(\rightarrow\) C \(\rightarrow\) E.
(नोट: कुछ व्याख्याओं में, पाचन के बाद प्रोटोप्लास्ट का विलगन (B) एक अंतर्निहित चरण माना जा सकता है, लेकिन दिए गए विकल्पों के अनुसार, यह क्रम सबसे तार्किक है।)
चरण 4: अंतिम उत्तर:
यह क्रम (D, A, B, C, E) विकल्प (B) से मेल खाता है। अतः, विकल्प (B) सही उत्तर है।