Question:

'त्यागपथी' खण्डकाव्य की कथावस्तु अपने शब्दों में लिखिए। (अधिकतम 80 शब्द)

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
त्यागपथी खण्डकाव्य के नायक सम्राट हर्षवर्धन हैं। उसकी कथा का सार 80 शब्दों में अपने शब्दों में लिखना है।

चरण 2: कथावस्तु (अधिकतम 80 शब्द):
थानेश्वर नरेश प्रभाकरवर्धन की मृत्यु के बाद राज्यवर्धन राजा बने। मालवराज ने हर्ष के बहनोई ग्रहवर्मा को मार डाला और बहन राज्यश्री को बन्दी बना लिया। राज्यवर्धन ने मालवराज को हराया, पर गौड़ नरेश शशांक ने छल से उनकी हत्या कर दी। तब हर्षवर्धन राजा बने। उन्होंने बहन को खोजकर बचाया और शत्रुओं का दमन किया। अन्त में वे राज-वैभव त्यागकर सेवा और दान का मार्ग अपनाते हैं।

चरण 3: अतिरिक्त बिन्दु (80 शब्दों की गिनती से बाहर):
1. हर्ष ने कन्नौज और थानेश्वर को मिलाकर विशाल साम्राज्य बनाया।
2. वे प्रजा-हित को अपना धर्म मानते थे और हर पाँच वर्ष में प्रयाग में अपना सारा धन दान कर देते थे।
3. काव्य का शीर्षक त्यागपथी उनके इसी त्याग-मार्ग की ओर संकेत करता है।

निष्कर्ष:
कथा का मूल सन्देश है कि सच्चा शासक वही है जो सत्ता का उपयोग जन-सेवा और त्याग के लिए करे।
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