Question:

'मुक्ति यज्ञ' खण्डकाव्य का कथानक अपने शब्दों में लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: परिचय:
‘मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य के कवि सुमित्रानन्दन पन्त हैं। यह उनके महाकाव्य ‘लोकायतन’ का एक अंश है। इसमें सन् 1921 से 1947 तक के भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की मुख्य घटनाएँ हैं और नायक महात्मा गाँधी हैं।

चरण 2: कथानक:
1. कथा साबरमती आश्रम से आरम्भ होती है। अंग्रेजों के नमक-कर के विरोध में गाँधीजी दाण्डी यात्रा करते हैं और समुद्र-तट पर नमक बनाकर नमक कानून तोड़ते हैं।
2. इससे जनता जाग उठती है। अंग्रेज दमन करते हैं और हजारों लोग जेल जाते हैं।
3. गाँधीजी के आह्वान पर स्वदेशी को अपनाया जाता है और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार होता है।
4. साइमन कमीशन का विरोध और सन् 1942 का ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन होता है।
5. सन् 1947 में देश स्वतन्त्र होता है, पर विभाजन से गाँधीजी दुखी होते हैं और साम्प्रदायिक एकता की अपील करते हैं।

निष्कर्ष:
देश की मुक्ति के लिए किया गया यह सत्य और अहिंसा का यज्ञ है, इसीलिए नाम ‘मुक्तियज्ञ’ सार्थक है।
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