Question:

'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य के 'संदेश सर्ग' का सारांश लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सर्ग का परिचय:
‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य के रचयिता डॉ. शिवबालक शुक्ल हैं। ‘संदेश’ इसका छठा सर्ग है और कथा का अत्यन्त मार्मिक भाग माना जाता है।

चरण 2: संदेश सर्ग की कथा:
आश्रम में श्रवण के अन्धे माता-पिता पुत्र की प्रतीक्षा में व्याकुल हैं। श्रवण को जल लेकर लौटने में देर हो चुकी है। तभी राजा दशरथ जल लेकर आश्रम पहुँचते हैं।
वे अपना परिचय अजपुत्र (अज के पुत्र) दशरथ के रूप में देते हैं। फिर वे काँपते स्वर में बताते हैं कि अनजाने में शब्दभेदी बाण से उनके पुत्र का वध हो गया है।
यह समाचार सुनकर माता-पिता शोक से विह्वल हो उठते हैं। वे विलाप करते हैं और पुत्र के पास ले चलने को कहते हैं। सरयू-तट पर पहुँचकर वे पुत्र के शव को छूते हैं और मूर्च्छित हो जाते हैं।

निष्कर्ष:
इस सर्ग में दशरथ का पश्चात्ताप और माता-पिता का करुण विलाप दिखाया गया है। आगे के सर्ग में इसी शोक से शाप की घटना जन्म लेती है।
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