Question:

'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिये। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सर्ग का विषय:
गुलाब खण्डेलवाल के खण्डकाव्य ‘आलोकवृत्त’ के द्वितीय सर्ग में गाँधी जी के प्रारम्भिक जीवन का विकास दिखाया गया है।

चरण 2: कथावस्तु:
बचपन में गाँधी जी कुसंगति में पड़ जाते हैं। वे अपने को शक्तिशाली बनाने की सोच से चोरी-छिपे मांस खाते हैं और इसके लिए झूठ बोलते हैं। पर उनका मन भीतर से पश्चात्ताप करता है।
वे अपनी भूलें पिता के सामने स्वीकार करते हैं और बुरी आदतें छोड़ने की प्रतिज्ञा करते हैं।
कस्तूरबा से उनका विवाह होता है। कुछ समय बाद पिता का देहान्त हो जाता है।
उच्च शिक्षा के लिए वे इंग्लैंड जाते हैं। माता ने जाने से पहले उन्हें मद्य, मांस और परस्त्री से दूर रहने की शपथ दिलाई थी। वहाँ वे संयम और सात्त्विक जीवन बिताते हैं।
बैरिस्टर बनकर भारत लौटने पर उन्हें माता के देहान्त का दुःखद समाचार मिलता है।

निष्कर्ष:
यह सर्ग बताता है कि भूल स्वीकार करने और संकल्प पर टिके रहने से साधारण बालक भी महान् बनता है।
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