Question:

'त्यागपथी' खण्डकाव्य के आधार पर 'पंचम सर्ग' की कथा अपने शब्दों में लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सर्ग का स्थान:
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य पाँच सर्गों में है। पंचम सर्ग अन्तिम सर्ग है और इसमें हर्षवर्द्धन के त्याग की चरम स्थिति दिखाई गई है।

चरण 2: पंचम सर्ग की कथा:
हर्षवर्द्धन एक आदर्श राजा के रूप में शासन करता है। वह सदा जन-कल्याण और शास्त्र-चिन्तन में लगा रहता है। उसके राज्य में प्रजा सुखी है और विद्वानों का सम्मान होता है।
राजा हर्ष प्रयाग में महादान का आयोजन करता है। वह अपना सारा राजकोष दीन-दुखियों, विद्वानों और धार्मिक संस्थाओं को दान कर देता है।
सब कुछ बाँटने के बाद वह अपने लिए कुछ नहीं रखता और वस्त्र भी बहन राज्यश्री से माँगकर पहनता है।
इस प्रकार के सर्वस्व-दान का आयोजन वह छह बार करता है। वह इसे प्रजा के ऋण से मुक्ति कहता है।
हर्ष भारतीय संस्कृति का प्रसार भी करता है।

निष्कर्ष:
इस सर्ग में हर्ष सचमुच ‘त्यागपथी’ सिद्ध होता है, जो राज्य को भोग की वस्तु नहीं, प्रजा की धरोहर मानता है।
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