चरण 1: काव्य का परिचय:
‘आलोकवृत्त’ गुलाब खण्डेलवाल का आठ सर्गों वाला खण्डकाव्य है। इसमें महात्मा गाँधी के जन्म से स्वतन्त्रता-प्राप्ति तक के जीवन और स्वाधीनता-संग्राम की कथा है।
चरण 2: कथावस्तु:
1. प्रथम सर्ग: भारत के गौरवशाली अतीत और पराधीनता का वर्णन है। गुजरात के पोरबन्दर में गाँधी जी का जन्म होता है।
2. द्वितीय सर्ग: बचपन की भूल पर पश्चात्ताप, माता को दिया मद्य-मांस त्याग का वचन, कस्तूरबा से विवाह, इंग्लैण्ड में पढ़ाई और बैरिस्टर बनकर वापसी।
3. तृतीय सर्ग: दक्षिण अफ्रीका में रेल से उतारे जाने पर रंगभेद का अपमान। वहाँ उन्होंने सत्य-अहिंसा पर आधारित सत्याग्रह अपनाया।
4. चतुर्थ सर्ग: भारत लौटकर साबरमती आश्रम की स्थापना, चम्पारन के नील-किसानों और खेड़ा के सत्याग्रह का नेतृत्व।
5. पंचम सर्ग: नागपुर अधिवेशन और असहयोग आन्दोलन। साम्प्रदायिक दंगों से दुःखी होकर हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए इक्कीस दिन का उपवास।
6. षष्ठ सर्ग: चौबीस दिन की डाण्डी-यात्रा और नमक-सत्याग्रह, हजारों की गिरफ्तारी, गोलमेज सम्मेलन।
7. सप्तम सर्ग: द्वितीय विश्वयुद्ध, क्रिप्स मिशन की विफलता, भारत छोड़ो आन्दोलन, गाँधी जी का कारावास और कस्तूरबा से वार्तालाप।
8. अष्टम सर्ग: स्वतन्त्रता का उदय, साम्प्रदायिक दंगे और गाँधी जी की शान्ति-प्रार्थना।
निष्कर्ष:
काव्य गाँधी जी को सत्य, अहिंसा और मानव-कल्याण के आलोक-पुंज के रूप में प्रस्तुत करता है।