निम्नलिखित काव्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
आगहन देवस घटा निशि बारी।
दूसर, दुख सो जाइ किमि कारी॥
अब धनि देवस बिरह भा राती।
जरे बिरह ज्यों दीपक बाती॥
काँपा हिया जनावा सीऊ।
तो पै जाइ होइ सँग पीऊ॥
घर घर चीर रचा सब काहूँ।
मोरे रूप रंग ले गा नाहूँ॥