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'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु से मिलकर कवि को कैसी अनुभूति होती है ?

Updated On: Jan 23, 2026
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Solution and Explanation

'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु की दंतुरित मुस्कान देखकर कवि नागार्जुन को अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है।
वे इस मुस्कान को देखकर इतने भाव-विभोर हो जाते हैं कि उन्हें लगता है जैसे उनके भीतर से सारी उदासी और निराशा समाप्त हो गई हो।
कवि को ऐसा महसूस होता है मानो पत्थर पिघलकर जल बन गया हो और तालाब छोड़कर कमल उनकी झोपड़ी में खिल गए हों।
यह मुस्कान कवि के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता भर देती है।
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