'विगत एक-दो दशकों से युवा वर्ग में अपव्यय की प्रवृत्ति बढ़ रही है। भोगवाद की ओर युवक अधिक प्रवृत्त हो रहे हैं। वे सुख-सुविधा की प्रत्येक वस्तु पा लेना चाहते हैं और अपनी आय और व्यय में तालमेल बिठाने की उन्हें चिंता नहीं रहती है। धन-संग्रह न सही, कठिन समय के लिए कुछ बचाकर रखना भी वे नहीं चाहते। लुभावने विज्ञापनों के माध्यम से लुभाकर उत्पादक व्यवसायी उन्हें भरमाते हैं। परिणामस्वरूप आज का युवक मात्र उपभोक्ता बनकर रह गया है। अनेक कम्पनियाँ क्रेडिट कार्ड देकर उनकी खरीद-शक्ति को बढ़ाने का दावा करती है।'
'चरम वैयक्तिकता ही परम सामाजिक है' - किस शीर्षक पाठ की पंक्ति है ?
अंतोन चेखव किस देश के रहने वाले थे ?
जयशंकर प्रसाद का निधन कब हुआ था ?
तुलसीदास का स्थायी निवास स्थान कहाँ था ?
'सूरदास का जन्म स्थान कहाँ है ?
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'बोधा सिंह के पिता का नाम क्या था ?
'एक अकालिया सिख के बराबर होता है?
'छात्र आंदोलन का नेतृत्व स्वीकार करते समय जयप्रकाश नारायण की स्थिति कैसी थी?