वस्तुवाद से आप क्या समझते हैं?
Step 1: मूल प्रतिज्ञा.
सर्वस्व भौतिक; जो कुछ भी है वह पदार्थ/बल/नियमों का परिणाम—आत्मा/ईश्वर की आवश्यकता नहीं।
Step 2: भारतीय/पाश्चात्य रूप.
चार्वाक—प्रत्यक्षवाद, वेद/अनुमान की अस्वीकृति; आधुनिक—भौतिकवाद+विज्ञान—मस्तिष्क की तंत्रिका-व्याख्याएँ।
Step 3: बल और आलोचना.
बल—अनुभवजन्य व्याख्याएँ, विज्ञान-संगति; आलोचना—मूल्य/अर्थ/चेतना की स्वातंत्र्य-गुणवत्ता को सम्यक् न समझ पाना, नैतिक निष्कर्षों का संकुचन।
Step 4: समकालीन संवाद.
उद्भववाद, गुण-न्यूनन/अकटनशीलता, द्वि-आयामी मस्तिष्क–मन सिद्धान्त—भौतिक आधार के साथ चेतना की जटिलता पर विचार।
योग दर्शन में 'चित्तवृत्ति निरोध' को क्या कहते हैं?
भारतीय दर्शन की उत्पत्ति किससे मानी जाती है?
अद्वैत वेदान्त के अनुसार 'जगत' की सत्ता क्या है?
चार्वाक, बौद्ध और जैन किस दार्शनिक सम्प्रदाय में आते हैं?
स्याद्वाद को समझाने के लिए जैन दर्शन में कितने 'नयों/भंगियों' का प्रतिपादन किया गया?