बर्कले का आत्मनिष्ठ प्रत्ययवाद क्या है?
Step 1: प्रत्यक्ष का प्रधान्य.
इन्द्रियानुभव में जो कुछ दिया है, वही वस्तु है; "विचार" से बाहर किसी जड़-पदार्थ का प्रमाण नहीं।
Step 2: तर्क.
यदि वस्तु अनुभूति से परे स्वतन्त्र है, तो उसे कैसे जानेंगे? जानने का अर्थ ही अनुभूत होना है—इसलिए अस्तित्व अनुभूति-सम्बद्ध है।
Step 3: ईश्वर-आवश्यकता.
व्यक्तिगत अनुभव अस्थिर हैं; लेकिन वस्तु-जगत सुसंगत दिखता है—यह दैवी चेतना के सतत पर्यवेक्षण से सम्भव है।
Step 4: आलोचना/परिणाम.
स्वतन्त्र वस्तु-सत्ता का निषेध अनुभववाद को विशिष्ट दिशा देता है, पर 'अन्य-मन' और 'नियम-निष्ठ' जगत का आधार ईश्वर-मान्यताओं पर टिका रहता है।
योग दर्शन में 'चित्तवृत्ति निरोध' को क्या कहते हैं?
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अद्वैत वेदान्त के अनुसार 'जगत' की सत्ता क्या है?
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