उपयुक्त गद्यांश से सम्बंधित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
गद्यांश:
इच्छाएँ नाना हैं और नाना भिन्न विधियाँ हैं और वे उसे प्रबल रखती हैं। इस प्रवृत्ति से वह बार-बार चक्कर खाता है और निवृत्ति चाहता है। यह प्रवृत्ति और निवृत्ति का चक्र उसके हृदय से थकान मिटाता है, किंतु इस संसार की अभी राग-भोग से वह चाहता है कि अगले क्षण उतने ही भाव-विकार से वह उसका विनाश चाहता है।
प्रवृत्ति-निवृत्ति के चक्र में फँसा मनुष्य क्यों रह जाता है?
प्रेम और ईर्ष्या की वासनाओं में पड़कर मनुष्य की स्थिति कैसी हो जाती है?
रेखांकित अंश का आशय लिखिए।