अतिशयोक्ति अलंकार वह अलंकार है जिसमें किसी वस्तु, व्यक्ति या घटना के गुणों, आकार, संख्या या प्रभाव को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है ताकि उसकी महत्ता या प्रभाव को अधिक स्पष्ट किया जा सके। अतिशयोक्ति का उद्देश्य भाव को प्रबल करना और पाठक या श्रोता पर गहरा प्रभाव डालना होता है।
उदाहरण :
"मुझे तुम्हारे आने की हजारों वर्ष से प्रतीक्षा थी।"
यहाँ "हजारों वर्ष" की प्रतीक्षा वास्तव में असंभव या अतिशयोक्ति है, परंतु इससे यह भाव प्रकट होता है कि प्रतीक्षा बहुत लंबे समय तक और बड़ी उत्कंठा से की गई है।
एक अन्य उदाहरण:
"उसके आँसू सागर की बूंदों से भी ज्यादा थे।"
यहाँ आँसुओं की संख्या को इतना बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है कि वह एक सागर से भी अधिक प्रतीत हो रहे हैं, जिससे व्यक्ति की दुख की गहराई समझ में आती है।
इस प्रकार, अतिशयोक्ति अलंकार भाव की तीव्रता बढ़ाने और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है।