Question:

‘त्यागस्थ निश्चयी भी कभी हो जाता एक दिन तो होता ही है उसका बूँद बूँद अंत’ — ‘लीच’ कविता से उद्धृत इस पंक्तियों का प्रतीकात्मक अर्थ स्पष्ट कीजिए। 
 

Updated On: Jan 13, 2026
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Solution and Explanation


यह पंक्ति ‘लीच’ कविता की है जिसमें लीच को प्रतीक बनाकर ऐसे स्वार्थी और चिपकू व्यक्तियों की आलोचना की गई है जो बिना कुछ दिए केवल दूसरों का शोषण करते हैं। ‘त्यागस्थ निश्चयी’ उस लीच का प्रतीक है जो जब ठान ले, तो दूसरों का रक्त बूँद–बूँद चूसकर अंततः उसे समाप्त कर देता है। कवि यह बताना चाहता है कि ऐसे व्यक्तियों का पतन निश्चित है। यह पंक्तियाँ शोषण की पराकाष्ठा की ओर संकेत करती हैं।
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