स्वर-संधि के कितने भेद होते हैं?
स्वर-संधि के पाँच प्रमुख भेद होते हैं: दीर्घ-संधि: जब दो स्वर मिलकर एक दीर्घ स्वर (लंबा स्वर) का रूप धारण करते हैं। उदाहरण: "नदी" + "के" = "नदीके"। गुण-संधि: जब एक स्वर का गुणात्मक परिवर्तन होता है, जैसे अ + आ = आ। यण-संधि: जब स्वरों के मिलन से 'य' का प्रयोग होता है। उदाहरण: "मूल" + "आकर्षण" = "मूलाकर्षण"। अयादि-संधि: इसमें स्वर के बाद आने वाले स्वर के कारण परिवर्तन होता है। उदाहरण: "नदी" + "के" = "नदीके"। कृदंत-संधि: जब क्रिया से उत्पन्न होने वाला प्रत्यय किसी स्वर के साथ मिलकर स्वर परिवर्तन करता है।
उदाहरण: "चल" + "इसी" = "चलीसी"।
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
नवरत्न' में समास है