Concept:
- ‘सपनों के से दिन’ गुरदयाल सिंह की रचना है, जिसमें लेखक अपने बचपन और उस समय के स्कूली जीवन को याद करता है।
- प्रश्न के तीन भाग हैं – उस समय के कारण, आज की स्थिति, और अपना तर्कसंगत मत।
Step 1: पहला कारण, शिक्षा का तत्काल लाभ न दिखना।
उस समय अधिकांश परिवार खेती या छोटे काम-धंधों से जुड़े थे। माता-पिता को लगता था कि पढ़ाई से कोई सीधा लाभ नहीं, बच्चा खेत या दुकान पर काम करे तो तुरंत सहायता मिलेगी।
Step 2: दूसरा कारण, आर्थिक कठिनाई।
किताबें, कपड़े और फीस का खर्च उन परिवारों के लिए भारी था। जब घर चलाना ही कठिन हो, तो पढ़ाई विलासिता लगने लगती है।
Step 3: तीसरा कारण, स्कूल का डरावना वातावरण।
लेखक बताता है कि मास्टर प्रीतमचंद जैसे अध्यापक बच्चों को कठोर दंड देते थे। खाल उधेड़ देने वाली पिटाई के कारण बच्चे स्कूल से भागते थे।
जब बच्चा स्कूल जाने से रोता हो, तो माता-पिता भी जोर नहीं देते थे।
Step 4: अब वर्तमान की स्थिति पर अपना मत दीजिए।
आज दृष्टिकोण काफी बदल गया है। शिक्षा को रोजगार और उन्नति का मुख्य साधन माना जाता है, शिक्षा का अधिकार कानून बना है, मध्याह्न भोजन और छात्रवृत्तियाँ मिलती हैं, और शारीरिक दंड पर रोक है।
अब अधिकांश माता-पिता स्वयं चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ें।
Step 5: संतुलित निष्कर्ष लिखिए।
फिर भी परिवर्तन पूर्ण नहीं है। आज भी कुछ क्षेत्रों में गरीबी और बाल-श्रम के कारण बच्चे बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि दृष्टिकोण काफी बदला है, पर पूरी तरह नहीं।
Final Answer: उस समय अरुचि के कारण थे शिक्षा का तत्काल लाभ न दिखना, आर्थिक तंगी और स्कूल का कठोर दंड वाला वातावरण। आज स्थिति काफी बदल गई है, क्योंकि शिक्षा को रोजगार का साधन माना जाता है, कानूनी अधिकार और सुविधाएँ मिली हैं तथा शारीरिक दंड पर रोक है। फिर भी गरीबी और बाल-श्रम के कारण कुछ जगह आज भी यह समस्या बनी हुई है।