सावधान, मनुष्य ! यदि विज्ञान है तलवार, तो इसे दे फेंक, तज कर मोह, स्मृति के पार । हो चुका है सिद्ध, है तू शिशु अभी नादान; फूल - काँटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान । खेल सकता तू नहीं ले हाथ में तलवार; काट लेगा अंग, तीखी है बड़ी यह धार ।
Question: 1
उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
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किसी भी कविता के भाव को समझने के लिए उसके शीर्षक और कवि की रचनात्मक शैली को ध्यानपूर्वक पढ़ना आवश्यक होता है।
उपर्युक्त पद्यांश 'विज्ञान और मानव' शीर्षक से लिया गया है और इसके रचनाकार सुमित्रानंदन पंत हैं। इस कविता में विज्ञान के दुरुपयोग के प्रति सावधान करने का संदेश दिया गया है।
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Question: 2
रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए।
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काव्य की व्याख्या करते समय उसके प्रतीकात्मक अर्थ को समझने का प्रयास करें।
रेखांकित पंक्तियों में कवि ने मानव को यह बताया है कि वह अभी भी एक शिशु के समान अपरिपक्व है, जिसे यह समझ नहीं है कि क्या सही है और क्या गलत। उसे यह ज्ञान नहीं है कि फूल (अर्थात् अच्छाई) और काँटे (अर्थात् बुराई) में क्या अंतर है। अर्थात् विज्ञान के सही और गलत उपयोग के बीच का भेद जानने की उसमें योग्यता नहीं है। इसलिए उसे विज्ञान को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
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Question: 3
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने मानव को किसके प्रति सचेत किया है?
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विज्ञान की प्रगति तभी सार्थक होती है जब उसका उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाए, न कि विनाश के लिए।
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने मानव को विज्ञान के दुरुपयोग के प्रति सचेत किया है। उन्होंने यह समझाने का प्रयास किया है कि यदि विज्ञान का उपयोग विवेक और नैतिकता के बिना किया जाएगा, तो यह मानवता के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। अतः विज्ञान का सदुपयोग आवश्यक है।
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Question: 4
विज्ञान रूपी तलवार के सन्दर्भ में कवि ने क्या कहा है?
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विज्ञान के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों को संतुलित करने के लिए नैतिकता और विवेक का होना आवश्यक है।
कवि ने विज्ञान को एक तलवार के रूप में प्रस्तुत किया है, जो यदि सही हाथों में न हो तो वह विनाश का कारण बन सकती है। उन्होंने यह बताया है कि विज्ञान की शक्ति बहुत तीव्र और धारदार है, इसलिए इसे चलाने वाला व्यक्ति यदि नासमझ होगा, तो वह स्वयं अपने ही अंग काट बैठेगा। यह संकेत करता है कि विज्ञान का अंधाधुंध विकास और उसका अनुचित उपयोग समाज के लिए घातक हो सकता है।
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Question: 5
प्रस्तुत पद्यांश में प्रयुक्त रस एवं अलंकार का नाम लिखिए।
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रस और अलंकार का सही विश्लेषण करने के लिए काव्य के भाव और शैली को गहराई से समझना आवश्यक होता है।
प्रस्तुत पद्यांश में मुख्य रूप से शांत रस प्रयुक्त हुआ है, क्योंकि इसमें मानव को जागरूक करने और संयमित होने की शिक्षा दी गई है। साथ ही, इसमें उपमा अलंकार का प्रयोग किया गया है, जहाँ विज्ञान की तुलना तलवार से की गई है। उदाहरण:
- विज्ञान है तलवार (उपमा अलंकार)