रवीन्द्रनाथ ने इस भारतवर्ष को 'महामानव समुद्र' कहा है । विचित्र देश है यह ! असुर आये, - न जाने कितनी मानव-जातियाँ आये, शक आये, हूण आये, नाग आये, यक्ष आये, गंधर्व आये यहाँ आयीं और आज के भारतवर्ष को बनाने में अपना हाथ लगा गयीं। जिसे हम हिन्दू रीति-नीति कहते हैं, वह अनेक आर्य और आर्येतर उपादानों का मिश्रण है। एक-एक पशु, एक-एक पक्षी न जाने कितनी स्मृतियों का भार लेकर हमारे सामने उपस्थित हैं । अशोक की भी अपनी स्मृति - परम्परा है । आम की भी, बकुल की भी, चंपे की भी । सब क्या हमें मालूम है ? जितना मालूम है, उसी का अर्थ क्या स्पष्ट हो सका है ?
लेखक की पढ़ने की इच्छा और उसके पिता के विरोध के बीच के संघर्ष का वर्णन कीजिए।
यशोधर बाबू की पुरानी और नई पीढ़ी के बीच वैचारिक मतभेद (Generation Gap) के मुख्य कारण क्या थे?
अंबेडकर के अनुसार एक 'आदर्श समाज' की क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?
महामारी के समय ढोलक की आवाज़ गाँव वालों के लिए संजीवनी का काम कैसे करती थी?
लेखक ने 'बाज़ारूपन' से क्या तात्पर्य बताया है? ग्राहक को बाज़ार जाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?