चरण 1: निबन्ध की रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. पर्यावरण का अर्थ
3. पर्यावरण-संरक्षण का महत्त्व
4. प्रदूषण और उसके कारण
5. संरक्षण के उपाय
6. उपसंहार
चरण 2: निबन्ध: पर्यावरण संरक्षण का महत्त्व:
प्रस्तावना
प्रकृति ने मनुष्य को हवा, पानी, धरती, वन और जीव-जन्तु जैसे अनमोल उपहार दिए हैं। परन्तु आज विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य ने इन्हीं उपहारों को नष्ट करना शुरू कर दिया है। हवा जहरीली हो रही है, नदियाँ मैली हैं और धरती का तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में पर्यावरण की रक्षा हमारे अस्तित्व का प्रश्न बन गई है।
पर्यावरण का अर्थ
‘पर्यावरण’ शब्द परि और आवरण के मेल से बना है, जिसका अर्थ है चारों ओर से घेरने वाला। हमारे आस-पास की वायु, जल, मिट्टी, वनस्पति और प्राणी मिलकर पर्यावरण बनाते हैं। ये सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं और इनमें से किसी एक के बिगड़ने पर पूरा संतुलन बिगड़ जाता है।
पर्यावरण-संरक्षण का महत्त्व
स्वच्छ पर्यावरण से ही स्वस्थ जीवन सम्भव है। शुद्ध वायु से हमें ऑक्सीजन मिलती है, वृक्ष वर्षा कराते हैं और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं। स्वच्छ जल के बिना जीवन असम्भव है। प्रदूषित वातावरण दमा, कैंसर और हृदय रोग जैसी बीमारियाँ फैलाता है। हमारी अर्थव्यवस्था, खेती और उद्योग भी प्राकृतिक संसाधनों पर टिके हैं। यदि हम आज पर्यावरण को नहीं बचाएँगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ शेष नहीं रहेगा।
प्रदूषण और उसके कारण
पर्यावरण बिगड़ने के मुख्य कारण हैं तीव्र जनसंख्या-वृद्धि, वनों की अन्धाधुन्ध कटाई, कारखानों और वाहनों से निकलता धुआँ, रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अधिक प्रयोग, प्लास्टिक का कचरा और नदियों में गन्दे नाले का बहाव। इनसे वायु, जल, ध्वनि और मृदा-प्रदूषण बढ़ता है। ओजोन परत में छेद और ग्लोबल वार्मिंग इसके ही गम्भीर परिणाम हैं, जिनके कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं और मौसम का चक्र बदल रहा है।
संरक्षण के उपाय
पर्यावरण बचाने के लिए सबसे पहले अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। कारखानों में धुआँ और जल शुद्ध करने के संयंत्र अनिवार्य हों। प्लास्टिक का उपयोग घटाकर कपड़े या कागज के थैले अपनाएँ। सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा दिया जाए। जल की बचत करें और नदियों को गन्दगी से बचाएँ। सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 जैसे कानून बनाए हैं और हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, पर इन्हें कड़ाई से लागू करना आवश्यक है।
उपसंहार
पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार का काम नहीं, हम सबका कर्तव्य है। हमारी संस्कृति में वृक्ष, नदी और पृथ्वी को माता माना गया है। यदि हम प्रकृति का सम्मान करेंगे तो प्रकृति भी हमारी रक्षा करेगी। आइए संकल्प लें कि हम पेड़ लगाएँगे, जल बचाएँगे और धरती को हरा-भरा रखेंगे।
निष्कर्ष:
यह निबन्ध रूपरेखा के क्रम में लिखा गया है और प्रस्तावना से उपसंहार तक पूर्ण है।