चरण 1: रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. वनों का महत्त्व
3. वनों के कटने के कारण और दुष्परिणाम
4. वृक्षारोपण और वन-संरक्षण के उपाय
5. सरकार और समाज के प्रयास
6. उपसंहार
चरण 2: निबन्ध, वृक्षारोपण एवं वन-संरक्षण:
प्रस्तावना
वृक्ष धरती के आभूषण और मानव के सबसे सच्चे मित्र हैं। प्राचीन भारत में वनों को पूजनीय माना जाता था और ऋषि-मुनि वनों में ही साधना करते थे। आज बढ़ती जनसंख्या, उद्योग और शहरों के विस्तार ने वनों को संकट में डाल दिया है। ऐसे में वृक्षारोपण और वन-संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है।
वनों का महत्त्व
वृक्ष हमें प्राणवायु ऑक्सीजन देते हैं और वायु की हानिकारक गैस कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेते हैं। वे वर्षा कराने में सहायक हैं और मिट्टी को बहने से रोकते हैं। वनों से हमें लकड़ी, फल, औषधियाँ, गोंद और जड़ी-बूटियाँ मिलती हैं। वन असंख्य पशु-पक्षियों का घर हैं और जैव-विविधता को बचाए रखते हैं।
वनों के कटने के कारण और दुष्परिणाम
खेती, सड़क, कारखाने और मकान के लिए वनों को अन्धाधुन्ध काटा गया। लकड़ी की तस्करी और जंगलों में लगने वाली आग ने भी हानि पहुँचाई। इसके परिणामस्वरूप धरती का तापमान बढ़ रहा है, वर्षा अनियमित हो गई है, बाढ़ और भूस्खलन बढ़े हैं तथा अनेक जीव-जन्तु समाप्त होने की कगार पर हैं। शहरों में वायु प्रदूषण भी बहुत बढ़ गया है।
वृक्षारोपण और वन-संरक्षण के उपाय
हर व्यक्ति को अपने जन्मदिन और शुभ अवसरों पर कम से कम एक पौधा लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी करनी चाहिए। सड़कों, नदियों और खाली भूमि के किनारे पेड़ लगाए जाएँ। कटे हुए पेड़ के बदले नए पेड़ लगाना अनिवार्य हो। लकड़ी की जगह अन्य वस्तुओं का उपयोग बढ़ाया जाए और जंगलों में आग रोकने के प्रबन्ध किए जाएँ।
सरकार और समाज के प्रयास
हमारे देश में हर वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह में ‘वन महोत्सव’ मनाया जाता है। राष्ट्रीय वन नीति में देश के एक तिहाई भू-भाग को वनों से ढकने का लक्ष्य रखा गया है। सुन्दरलाल बहुगुणा और गौरा देवी जैसे लोगों का ‘चिपको आन्दोलन’ वनों की रक्षा का अनुपम उदाहरण है, जिसमें लोग पेड़ों से लिपट गए थे। स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं की भी बड़ी भूमिका है।
उपसंहार
वन हैं तो जल है, जल है तो जीवन है। यदि हमने आज वृक्ष नहीं लगाए और वनों को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और पानी भी नहीं मिलेगा। इसलिए हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम पेड़ लगाएँगे, उन्हें बचाएँगे और धरती को हरा-भरा बनाएँगे।
निष्कर्ष:
वृक्षारोपण और वन-संरक्षण मानव-जीवन की रक्षा का ही दूसरा नाम है।